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Kalyug Ka Ravaan Hoon by Sagar Mishra

Kalyug ka ravan hoon,
Bhrashtachar se ek garib ki naukri chinunga,
Usse aaj berozgaar banaunga
Kalyug ka Ravan hoon,
Ek sunder ladki ki zindagi narak karunga,
Aur khud nirdosh ho jaunga.

Kalyug ka ravan hoon,
Sab ko marne ke liye Aatank se jud jaunga,
Bharat ko tod dunga aur aatank he failaunga.
Kalyug ka Ravan hoon,
Dahej ladki walo se mangumga,
Dahej na dene par ladki ko jeete ji jalaunga.

Kalyug ka ravan hoon,
Ladka hone ka sapne sajaunga,
Ladki hone par usse maut ka dwar dikhaunga.
Kalyug ka Ravan hoon,
Sara din dhua uddaunga,
Nashe ka dost hoon nashe nein Doobaunga.

Kalyug ka Ravan hoon,
Darindagi ka chola odhunga,
Aur sach ka path padhunga.
Kalyug ka Ravan hoon,
Itna Bura karunga ki
Us Treta Yug ke Ravan ko bhi sharminda kar doonga.

Penned by
Sagar Mishra
Bhilai, Chhattisgarh, India


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