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कैसे भूल जाऊ by Sakshi Mishra

कैसे तुझे बतलाऊ ,
कैसे तुझे समझाऊ ,
कैसे तुझे बचाऊ ,
कैसे तुझे हकीकत से वाकिफ कराऊ,
कैसे तुझे बदलते समय से बचाऊ,
वो वक़्त जो खुदको फिर से दोहरा रहा

वो मनहूस से वक़्त मे कल जहाँ मैं थी ,
आज वहाँ तुम हो,
अफसोस है मुझे इस बात का।
इन्साफ ना उस वक़्त था ,
इन्साफ ना आज है।
उस वक़्त भी लोगों ने कहा की भूल जाओ सब ,
आज भी तुम्हे कहेगे की भूल जाओ सब।
लेकिन ना उस वक़्त किसी ने बताया ,
और ना आज कोई बातएगा ,
की कैसे भूल जाओ,
वो सारी बातो को।

उस वक़्त जो मेरी हालत थी ,
आज वो तुम्हारी हालत है।
उस वक़्त जो खेलने की उम्र थी ,
तब ना जाने कौन से खेल ने पैर पकड़ लिया।
वो हाथ जो आशिर्वाद के लिए होने थे ,
वो हाथ तो मेरे वक्ष पर थे।
वो नज़रे जिसे मेरी मासुमियत देखना था ,
वो नज़रे तो मुझे बेपरदा करने तैयार थी।
वो कदम जिसके पीछे पीछे चलकर दुनिया देखीं ,
वो कदम तो मेरे मन में दर्दनाक छाप छोड़कर चले गए।

वो आहट उनके कदमो के आने की ,
वो आहट मेरे कदमो के भाग जाने की।
वो हैवानीयत की पुकार बुलाती हुई ,
वो हैवानीयत से मैं दूर भागती हुई।
वो आवाज़े जो बार-बार सुनाई देते है ,
वो आवाज़े कैसे भूल जाऊ।

अब बस बहुत हुआ ,
बहुत देख लिया इस गलत इंसाफ को ,
बहुत देख लिया इस धाक्यानुसी सोच को ,
बहुत देख लिया इस समाज के साथ को।
अब बदलना है इस इंसाफ को ,
अब बदलना है इस सोच को ,
अब बदलना है इस समाज को।
ताकि अब कोई और लड़की ,
निर्भया, आसिफा या मैं ना बन पाउ l

वो वक़्त जो खुदको फिर से दोहरा रहा
वो मनहूस से वक़्त मे कल जहाँ मैं थी ,
आज वहाँ तुम हो,
अफसोस है मुझे इस बात का।
इन्साफ ना उस वक़्त था ,
इन्साफ ना आज है।

उस वक़्त भी लोगों ने कहा की भूल जाओ सब ,
आज भी तुम्हे कहेगे की भूल जाओ सब।
लेकिन ना उस वक़्त किसी ने बताया ,
और ना आज कोई बातएगा ,
की कैसे भूल जाओ,
वो सारी बातो को।

Penned by
Sakshi Mishra
Bhilai, Chhattisgarh, India

Comments

  1. Wahh Mishraji Kya likha hai aapne ...Dil se aapne puri Kahani Bayann krdi. .

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