Skip to main content

Posts

Showing posts with the label hindi poetry

Nazm by Ab Moqit

Sahar Ki Shabnam Raato Ka Siyah Phool Khushbu Gulo Ki Ranginiya Aab-o-hawa Har Mausam Tanhai Mahfil Shaad-o-gum Mar Mar Kar Ummed-e-hayaat Hijr Ke Baad Visaal Ki Raat Sab Ke Sab Aaye Abhi Tak Tum Aaye Nahi! Penned by Ab Moqit Dhanbad, Jharkhand, India 

लिखने वाले by Shivam Mishra

वो सदैव रहेंगे कलम से रिश्ता निभाने वाले, वो लिख देगें हर पल बीतने वाले, सारे शब्द जोर-जोर से चिखने वाले, बनी रहेगी दुनिया जब तक रहेंगे लिखने वाले। Penned by Shivam Mishra Delhi Cantt, India  

Main Dil Ko Naraaz Karunga by Ishaan Baba

Main Dil Ko Naraaz Karunga Tujhe Teri Haqeeqat Bata Dunga.. Tadpunga Khud Bhi Tujhe Bhi Kadi Sazaa Dunga.. Yeh Dard Yeh Aansu Mera Hi Kyun Muqadar Ho.. Main Teri Bhi Inse Ab Mulaqaat Kara Dunga.. Har Mumkin Tum Ne Koshish Kiye Badnaam Mujhe Karne Ki.. Khud Apni Dastaan Ab Sab Ko Main Suna Dunga.. Wafa Karunga Ab Sirf Ajal Se Main.. Chala Jaunga, Tujhe Dikhawey Ki Duniya Mein Jeeney Ki Sazaa Dunga.. Tu Dikhawey Ki Bulandi Pe Hai, Gir Padega Kabhi.. Main Haqeeqat Ka Ek Din Tujhe Aayeina Dikha Dunga.. Bada Rahi Hai Mere Dukh Har Jhooti Baat Woh Teri.. Main Dil Se Har Yaad Teri Ab Mita Dunga.. Bohat Dinu Se Mera Dil Udaas Hai Ishaan.. Rok Ke Dhadkanein Ab Zara Iss Dil Ko Araam Dunga.. Main Dil Ko Naraaz Karunga Tujhe Teri Haqeeqat Bata Dunga.. Tadpunga Khud Bhi Tujhe Bhi Kadi Sazaa Dunga... " Penned by Ishaan Baba Jammu & Kashmir

Meri Maa by Deepanshu Kumar

Maa Ek Shayari Ki Taran Hoti Hai Kabhi Dil Me Utar Aathi Hai To Kabhi Dil Me Utaar Leti Hai Tu Hai Meri Jaan Oh Meri Maa... Tere Pyar ki Dastaan, Sunega Jahan Zindagi Tune Di, Roshni Bhi Mili Chota Tha Main Kabhi, Rota Tha Main Tabhi Par Tu Na Ruki, Tune Di Har Khushi Oh Meri Maa, Tu Hai Meri Jaan Tu Nahi To Zindagi Ban Jaati Hai Veeran Teri Kami Ko Koi Bhi Pura Nahi Kar Sakta Insaan Tere Liye To Har Beta Hai Kurbaan Oh Meri Maa, Tu Hai Meri Jaan Penned by Deepanshu Kumar Rohini, Delhi, India

रूह का बंधन by Mohit Sah

तू जाग रहा रातों को अक्सर, माना प्रेम को पाना था पर क्या पूछा तुने है खुद से, क्या तू प्रेम दिवाना था? हाँ मान लिया जज्बात तेरे थे प्रेम प्रतिज्ञा में डूबे, पर क्या उन जज्बातों की नींव, सच्चाई का ज़माना था? खुश है ना तु मान गई वो, तुझको अपनाने को कर तैयारी देर नही अब, तुझको उसे भूलने को बस कुछ दिन इस प्रेम की अग्नि तुझको खूब जलाएगी फिर यूं हवस के शक्ल में प्रेम, खुद से ही रूठ जाएगी ना जाने संसार में कान्हा तेरा क्यों अवतरण हुआ? प्रेम सिखाने आया था न, लगता है न विफल हुआ जब रुह ने बंधन तोड़ दिया तब दो जिस्मों का मिलन हुआ एक रूह तो बाकी थी न उसमें जिसने उस फूल का सृजन किया जब रूह ने बंधन तोड़ दिया तब दो जिस्मों का मिलन हुआ हार गई है प्रेम तुम्हारी, तेरे हवस के चक्कर में टूट रहा है हर वह प्रेमी, तेरे छल के शक्कर में पर मानो छल तो बस अब, तेरे फितरत का हिस्सा है प्रेम बेचता गली - गली तु, अथक पुराना किस्सा है अब भी क्या अंतरमन तेरा, तुझको सही बताता है? प्रेम पुजारी प्रेम बेचता, शर्म ना तुझको आता है ना जाने क्यों, अब भी तुझको ना भूल अपना स्मरण हुआ जब रुह ने बंधन तोड़ दिया...

चल ख्वाब देखते हैं by Nitin Nirmohi

चल ख्वाब देखते हैं ख्वाब मे खुशियाँ बेहिसाब देखते हैं टूटे हैं रूठे हैं असल जिंदगी मे तो क्या! ख्वाब मे ही सही इंक़लाब् देखते हैं चल ख्वाब देखते हैं। हर राज़ का छुपा हुआ हर राज़ देखते हैं अंदाज का छुपा हुआ अंदाज देखते हैं होश मे तो ढूंढ लिया अपना मुकद्दर नींद मे भी आज तलबग़ार देखते हैं चल ख्वाब देखते हैं। चल देखते हैं आज की, कल होगा सब मुकम्मल जो देखे सपने हमने जो हमने सोचा था कल बेअसर है आज अपनी हर दुआ ये माना चल मांगते हैं फिर से ना हिसाब देखते हैं चल ख्वाब देखते हैं ख्वाब मे खुशियाँ बेहिसाब देखते हैं। Penned by निर्मोही Pashchim Vihar, Delhi, India

बेजुबां इश्क़ by Ayushi Tyagi

लड़ते भी हो इतना और प्यार भी हद पार करते हो लफ़्ज़ों से नहीं तुम आंखों से सब बात कह देते हो रास्ते में मुझे हमेशा खुद से आगे रखते हो भीड़ में मेरा हाथ कसके पकड़ लेते हो मेरे ख्वाबों को पंख भी देते हो उजाले में छुपा अंधेरा भी दिखाते हो मेरे चेहरे की रौनक तुम्हारी हिम्मत है और मेरी नादानियाँ तुम्हारे लिए कमजोरी मेरी आँखें पढ़ने का हुनर कहाँ से सीखा है तुमने? मेरी आवाज़ से दर्द जानने का तरीका कैसे समझा तुमने? मेरे कदमों से मेरे सपने को किस तरह परखा तुमने? मेरे दिल की धड़कनों को कब सुना तुमने ? हाँ, यह सवालों के जवाब जानना जरूरी है मेरे लिए की सच है या कोई फ़साना तो नहीं मेरे लिए हो सके तो सपनों में नहीं हक़ीक़त में आना इस बेजुबां इश्क़ की किताब का नाम पूछना है तुमसे जो मेरे हर एक राज जानती है। Penned by Ayushi Tyagi Ghaziabad, UP, India  

मै भी देखूँ by Sachin Kumar Ken

कौन है यहाँ ख़रीदार मै भी देखूँ इस बाजार का मेयार मै भी देखूँ अवाम-ए-लहू से नही रँगे हों जो मुल्क के वो अख़बार मै भी देखूँ अफ़वाह है तुम्हारे शोला होने की छू कर तुम्हे एक बार मै भी देखूँ छोड़कर कस्तियों को आओ सब कौन करे है दरिया पार मै भी देखूँ क़त्ल किया जिसने मुझे,मेरे किस अपने की है वो तलवार मै भी देखूँ Penned by Sachin Kumar Ken Hapur, UP, India  

Ishq Ki Tadap (इश्क़ की तड़प) | Podcast | Momina Khan

Kalyug Ka Ravaan Hoon by Sagar Mishra

Kalyug ka ravan hoon, Bhrashtachar se ek garib ki naukri chinunga, Usse aaj berozgaar banaunga Kalyug ka Ravan hoon, Ek sunder ladki ki zindagi narak karunga, Aur khud nirdosh ho jaunga. Kalyug ka ravan hoon, Sab ko marne ke liye Aatank se jud jaunga, Bharat ko tod dunga aur aatank he failaunga. Kalyug ka Ravan hoon, Dahej ladki walo se mangumga, Dahej na dene par ladki ko jeete ji jalaunga. Kalyug ka ravan hoon, Ladka hone ka sapne sajaunga, Ladki hone par usse maut ka dwar dikhaunga. Kalyug ka Ravan hoon, Sara din dhua uddaunga, Nashe ka dost hoon nashe nein Doobaunga. Kalyug ka Ravan hoon, Darindagi ka chola odhunga, Aur sach ka path padhunga. Kalyug ka Ravan hoon, Itna Bura karunga ki Us Treta Yug ke Ravan ko bhi sharminda kar doonga. Penned by Sagar Mishra Bhilai, Chhattisgarh, India

कुमकुम से सिंदूर तक by Priya Dwivedi

वो धीरे - धीरे पंजों से, पैरों पर चलने लगी, उसकी ज़िन्दगी की कहानी, कुछ इस तरह से आगे बढ़ने लगी। पहले स्कूल जाती थी, अब वो कॉलेज जाने लगी, वो कुछ लोगों को भी, अब अपना मानने लगी। फिर समझदार वो थोड़ी और हुई, और किसी रोज़ कुछ रिश्ते की बात हुई, वो थोड़ी इतराई और शरमाई, फिर बात विवाह पे, उसके आयी। तैयारियां भी कुछ ऐसे होने लगी, वो खुश तो थी, पर मन ही मन रोने लगी। ये सोचकर कि कुछ दिनों बाद... अपने दूसरे घर में जाना था उसे, वो फिर से अपनी मां की गोदी में सोने लगी। जयमाला हाथ में था उसके, अंगूठी भी बड़ी प्यारी थी, दुल्हन बनके आयी जब वो, लगा जैसे खुद चांद ने... अपनी सुन्दरता हारी थी। सिंदूर माथे पर सज गया, सातवां फेरा भी पूरा हो गया, अब रस्म रुलाने की आयी, अब बात विदाई की आयी। और साथ में सबकी आंखें भी, आंसुओं से भर आयी। पर ना रोने की इस चुनौती में, अश्कों का बहना जायस था... क्योंकि ये रस्म कुछ दुखदाई सी थी, यहां बात बेटी की विदाई की थी। लाख आंसुओं को रोक कर, कुछ आंसू उसके पापा ने भी बहाए थे, और कुमकुम से सिंदूर तक, हजारों रस्मो को निभाने वाले, बाबुल ...

Heart Touching Shayaris by Raghav Raghuvanshi

Dil Lagakar Dil Ko Mere by Madhu Madhubala

Kin Panno Ka Daftar Dhona Hai by Arman Chulbul

Wo Bahut Jhoot Bolati Hai by Praveen Kumar

Jeete Jee Ji Naa Sake Tere Ishq Me by Neha Mishra

Adhura Hai Aaj Bhi Pyar Mera by Rahul Deewana

Ae Maa Tujhse Bhool Huyi by Deepak Gautam

Pyar Me (प्यार में)... by Satyam Pandey

Kuchh Khwab Thhe by Sitanshu Tripathi