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Eid by Ab Moqit

Ku ba ku me khushiyan hain chhai
Pairahan pe khushbu aankhe surmai
Bachhon ki shor o gul me de rahi sunai
Dekho eid aayi eid aayi eid aayi

Kaha dekhne ko milti ye khushnumai
Gale milte sab de rahe hain dikhai
Bachhe budhe aur bhai bhai
Dekho eid aayi eid aayi eid aayi

Ghar ghar ja kar rasme nibhai
Sabhi ne mil kar khub hai khai
Lachcha sawaiyan aur mithhi mithhai
Dekho eid aayi eid aayi eid aayi

Khak ki gamo ko di mohabbat ki raushnai
Sabhi logo ne mil kar mahfil sajai
Haar hui burai ki jeet gayi achchhai
Dekho eid aayi eid aayi eid aayi

Kya bataye kya hai khudai
Rozedaaro ke liye saugaat layi
Jhuum uthhe diwane jhuum uthhi shaidai
Dekho eid aayi eid aayi eid aayi

Penned by
Ab Moqit
Dhanbad, Jharkhand, India


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हाल - ए - दिल by Ankit Dubey

हाल- ए- दिल बयान मैं सरेआम करता हूं, अपनी कविता के हर अल्फ़ाज़ तुम्हारे नाम करता हूं। जो तुम हो तो लगता है पूरी दुनियां जीत जाऊंगा , तुम बिन ये ज़िन्दगी चंद टुकड़ों पर नीलाम करता हूं।। हाल - ए - दिल बयान मैं सरेआम करता हूं.... तुम्हारा होना जैसे एक सहारे सा होता है, तुम कुदरत का कोई फरिश्ता हो, इस बात के इशारे से लगता है। तुम्हारे साथ होता हूं तो ज़िन्दगी के हर ग़म भूल जाता हूं, तुम्हारे आंखों के समंदर पर चलते किनारे सा होता हूं।। हाल - ए - दिल बयान मैं सरेआम करता हूं... मुझको मालूम है इस गुस्ताख़ी का अंजाम क्या होगा, जिसने हार दिया सब कुछ वो अब गुमनाम क्या होगा। टूट के कोई फूल गिरा है मेरी टहनियों से , जो पतझड़ में हुआ बेज़ार वो अब गुलज़ार क्या होगा।। हाल - ए - दिल बयान मैं सरेआम करता है, अपनी कविता के हर अल्फ़ाज़ तुम्हारे नाम करता हूं.. Penned by Ankit Dubey Faridabad, Haryana, India  

ग़ज़ल by Sachin Kumar Ken

ख्वाबों को रख सिरहाने सो जाते हैं चलो नींद के इन्तजार में सो जाते हैं एक तस्वीर जगाती रहती है रात भर हारे थके हम आँख मूँदके सो जाते है कोई पूछने न लगे सबब गुमशुदगी का दरवाजे खिड़कियाँ बन्द कर सो जाते हैं महलों में भी नींद आती नही किसी को लोग आसमाँ को छत समझ सो जाते हैं मखमली कम्बलों का कारीगर है वो बच्चे फ़टी चादर ओढ़कर सो जाते है आयेगें ख्वाब में फ़रिश्ते रोटियाँ लेकर बच्चे यतीम इसी उम्मीद में सो जाते है लोरियों का दौर रहा नही अब शायद बच्चे कानो में इयरफोन लगाये सो जाते है लगाकर आग मुफ़लिसों की बस्ती में कैसे सुकून से वो अपने घरों में सो जाते है Penned by, Sachin Kumar Ken Modinagar Road, Hapur, India - Get your content published on our FB pages and Blog... it's FREE! Submit your content thru this form bit.ly/bopregistration Subscribe to our YouTube channel www.youtube.com/c/blossomofpoetry

बेजुबां इश्क़ by Ayushi Tyagi

लड़ते भी हो इतना और प्यार भी हद पार करते हो लफ़्ज़ों से नहीं तुम आंखों से सब बात कह देते हो रास्ते में मुझे हमेशा खुद से आगे रखते हो भीड़ में मेरा हाथ कसके पकड़ लेते हो मेरे ख्वाबों को पंख भी देते हो उजाले में छुपा अंधेरा भी दिखाते हो मेरे चेहरे की रौनक तुम्हारी हिम्मत है और मेरी नादानियाँ तुम्हारे लिए कमजोरी मेरी आँखें पढ़ने का हुनर कहाँ से सीखा है तुमने? मेरी आवाज़ से दर्द जानने का तरीका कैसे समझा तुमने? मेरे कदमों से मेरे सपने को किस तरह परखा तुमने? मेरे दिल की धड़कनों को कब सुना तुमने ? हाँ, यह सवालों के जवाब जानना जरूरी है मेरे लिए की सच है या कोई फ़साना तो नहीं मेरे लिए हो सके तो सपनों में नहीं हक़ीक़त में आना इस बेजुबां इश्क़ की किताब का नाम पूछना है तुमसे जो मेरे हर एक राज जानती है। Penned by Ayushi Tyagi Ghaziabad, UP, India